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business idea for electronics technician, इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्निशियन के लिए बिजनेस आइडिया

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 दोस्तों अगर आप इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में एक बेहतरीन टेक्नीशियन हैं और आपके पास पैसे नहीं है की मै एक रिपेयरिंग शॉप खोल सकू, और आप चाहते हैं कि मैं बिना रिपेयरिंग शॉप खोले बगैर पैसे कैसे कमा सकता हु तो यह आर्टिकल आपके लिए है. मैं इस आर्टिकल में आपको कुछ ऐसे तरीके बताऊंगा, जिसको अपना कर आप अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हैं, और यह तरीका सभी टेक्नीशियन पर भी लागू होता है. अगर आपके पास दुकान है तब भी और नहीं है तब भी यह सभी लोगों के लिए काम करेगा- दोस्तों इस तरीके का लाभ उठाने के लिए आपको इलेक्ट्रॉनिक का काम आना चाहिए, आप के पास जितना ज्यादा ज्ञान होगा आप उतना ही ज्यादा मुनाफा कमाएंगे, आप इलेक्ट्रॉनिक के फील्ड में मल्टीपल काम करते होंगे या करने आता है तो आप इतना ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं की एक रिपेयरिंग शॉप भी फीका पड़ सकता है।  अब आपको काम क्या क्या आना चाहिए जैसे कलर टीवी रिपेयरिंग, DTH रिपेयरिंग एवं फिटिंग इनवर्टर, स्टेब्लाइज़र जैसे उपकरण की मरम्मत करने आपको आना चाहिए अगर आप एलसीडी, LED का भी ज्ञान रखते है तो सोने पर सुहागा हो जायेगा, आप इन उपकरड़ो को मरम्मत करने में माहिर है तो आपको पैसे

you will become wiser, समझदार हो जाओगे

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चार मोंग्स ने 2 सप्ताह तक बिना कुछ बोले चुपचाप ध्यान करने का निश्चय किया, उन्होंने अपने इस अभ्यास के प्रतीक के रूप में एक मोमबत्ती जलाई जो कि उन्हें हर वक्त याद दिलाती रहेगी उन्हें बिना कुछ बोले बस ध्यान करना है. इसके बाद उन मोंग्स ने ध्यान करना शुरू किया, पहले दिन की रात होते-होते मोमबत्ती टीम टीमाई  और फिर बुझ गई. यह देखते ही पहले मोंग्स ने कहा अरे नहीं यह मोमबत्ती तो बुझ गई दूसरे मोंग्स ने कहा हमें बात नहीं करनी चाहिए,  हमने कुछ भी ना बोलने की कसम खाई थी, तीसरे मोंग्स कहा तुम दोनों को बोलने की क्या जरूरत थी, चौथा मोंग्स हँसा और बोला हा हा हा मैं अकेला हूं जिसने बात नहीं की बात नहीं की, दोस्तों उन सभी के बोलने की अपने अलग-अलग कारण थे लेकिन चारों में से प्रत्येक ने बिना कुछ सोचे तुरंत ही अपने विचार रख दिए उनमें से किसी ने स्थिति को सुधारने का प्रयास नहीं किया, उसी आश्रम में उन चारों के अलावा एक बूढ़ा बुद्धिमान मोंग्स भी था,वह बिना कुछ बोले और उनकी तरफ ध्यान दिए बिना ही चुपचाप ध्यान करता रहा इस तरह से उसने बिना एक शब्द बोले उन चारों को ही उनकी गलती का एहसास करा दिया जो कि वह चारों बोल

secret of success, सफलता का रहस्य

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 गर्मी की छुट्टियों में दादाजी के पास गांव घूमने आया बालक उछलते कूदते दादाजी के पास पहुंचा और बड़े गर्व से बोला दादा जी जब मैं बड़ा हो जाऊंगा ना तब मैं एक बहुत सफल आदमी बनूंगा क्या आप मुझे सफल होने के कुछ उपाय बता सकते हैं. दादाजी ने हां में सिर हिला दिया और बिना कुछ कहे लड़के का हाथ पकड़ा और उसे करीब की पौधशाला ले गये, वहां जाकर दादा जी ने दो छोटे-छोटे पौधे खरीदे और घर वापस आ गए, वापस लौटकर उन्होंने एक पौधा घर के बाहर लगा दिया और एक पौधा गमले में लगाकर घर के अंदर रख दिया, क्या लगता है तुम्हें इन दोनों में से भविष्य में कौन सा पौधा अधिक सफल होगा दादाजी ने लड़के से पूछा, लड़का कुछ देर तक सोचता रहा और फिर बोला घर के अंदर वाला पौधा ज्यादा सफल होगा क्योंकि वह हर एक खतरे से सुरक्षित है. जबकि बाहर वाले पौधे को तेज आंधी पानी और जानवरों से भी खतरा है दादा जी बोले चलो देखते हैं. आगे क्या होता है और दादा जी अखबार उठा कर पढ़ने लगे, दादा जी दोनों पौधों पर एक समान ध्यान देते रहे और समय बीतता गया,  तीन चार साल बाद एक बार फिर लड़का अपने माता-पिता के साथ गांव घूमने आया और उसने अपने दादाजी को देखा तो दे

right way of thinking, सोचने का सही तरीका

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एक समय की बात है एक राज्य में एक राजा राज्य करता था उसकी केवल एक आंख थी और एक पैर था, इन कमजोरियों के बाद ही वह एक कुशल दयालु और बुद्धिमान शासक था, उसके शासन में प्रजा बहुत खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही थी, एक दिन राजा अपने महल के गलियारे में टहल रहा था तभी अचानक उसकी नजर गलियारे की दीवारों पर लगे चित्रों पर पड़ी वे चित्र उसके पूर्वजों की थी, उन चित्रों को देख राजा के मन में विचार आया कि भविष्य में जब उसके उत्तराधिकारी  महल के उस गलियारों में से गुजरेंगे तो उन चित्रों को देख अपने पूर्वजों को स्मरण करेंगे, राजा का चित्र अब तक उस दिवार पर नहीं लगा था, अपनी शारीरिक अक्षमताओं के कारण वह नहीं जानता था कि उसका चित्र कैसा दिखेगा लेकिन उस दिन उसने सोचा कि उसे भी अपना चित्र उस दीवार पर लगवाना चाहिए, अगले दिन उसने अपने राज्य के श्रेष्ठ चित्रकारों को दरबार में आमंत्रित किया, दरबार में उसने घोषणा की कि वह महल में लगवाने के लिए अपना सुंदर चित्र बनाना चाहता है. जो उसका सुंदर चित्र बना सकता है वह चित्रकार आगे आए चित्र जैसा बनेगा वैसा ही उस चित्रकार को इनाम दिया जाएगा, दरबार में उपस्थित चित्रकार अपनी कला

never deviate from your goal, अपने लक्ष्य से कभी विचलित नही होंगे

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एक युवक अपने गुरु के पास वर्षों तक रहा लेकिन गुरु ने उसे कभी कुछ करने के लिए नहीं कहा, शिष्य बार-बार पूछता रहता कि मुझे कुछ कहे कुछ आदेश दे मैं क्या करूं, लेकिन गुरु हमेशा यही कहते मुझे देखो मैं जो करता हूं वैसा करो मैं जो नहीं करता वह मत करो इसे ही अपनी सीख समझो, लेकिन उसने कहा इससे मेरे कुछ समझ में नहीं आता मुझे कहीं और भेज दे, जेन परंपरा में ऐसा होता है कि अगर शिष्य मांग करता है कि उसे ज्ञान की प्राप्ति के लिए कहीं और भेजे तो गुरु को ऐसा करना पड़ता है. तो गुरु ने कहा ठीक है यहां से कुछ मील दूर एक सराय है वहां जाकर तू 24 घंटे ठहर है. वह सराय का मालिक तुझे बहुत कुछ सिखा देगा, उस शिष्य ने अपने गुरु को प्रणाम किया और वहां से चल पड़ा, रास्ते भर वो यह सोचता रहा कि जब इतने बड़े गुरु के पास आकर ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ तो भला वह सराय का मालिक मुझे क्या सिखा देगा आखिर है तो धर्मशाला का रखवाला ही ना, वह बस बेमन से चला जा रहा था वह जब उस सराय के पास पहुंचा तो उस सराय के मालिक की शक्ल सूरत देखकर उसका दिमाग खराब हो गया उसने सोचा कि भला यह मुझे क्या सिखाएगा लेकिन क्या 24 घंटे तो रुकना ही था, गुरु क

fill as you do, जैसा करोगे वैसा ही भरोगे

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एक दिन एक जेन मठ में सभी शिष्य अपने गुरु के चारों ओर इकट्ठा हुए, गुरु बोले मैं जो कहानी सुना रहा हूं उसे पूरे ध्यान से सुनो फिर उन्होंने कहना शुरू किया, एक बार बुध अपनी आंख बंद किए हुए बैठे थे, तभी उन्हें किसी की आवाज सुनाई दी बचाओ बचाओ उन्हें समझ आ गया कि यह आवाज किसी मनुष्य की थी, जो नर्क के किसी गड्ढे में था और पीड़ा भोग रहा था, बुद्ध को यही समझ में आया कि उसे यह दंड इसलिए दिया जा रहा था क्योंकि जब वह जिंदा था तब उसने बहुत सी हत्याएं और चोरिया की थी, उन्हें सहानुभूति का अहसास हुआ और वह उसकी मदद करना चाहते थे उन्होंने यह देखने का प्रयास किया कि क्या उस व्यक्ति ने अपने जीवित अवस्था में कोई अच्छा काम किया था, उन्हें पता लगा कि उसने एक बार सड़क पर चलते हुए उसने इस बात का ध्यान रखा था कि एक मकड़ी पर उसका पैर न पड़ जाए तो बुद्ध ने उस मकड़ी से उस व्यक्ति की मदद करने के लिए कहा, मकड़ी ने एक लंबा मजबूत धागा नर्क के उस गड्ढे में भेजा जिससे वह अपनी जाला बुनती है. वह व्यक्ति उस धागे को पकड़ कर ऊपर चढ़ने लगा तब बाकी के लोग भी वहां यातना भोग रहे थे उसी धागे को पकड़ कर ऊपर चढ़ने लगे तो उस व्यक्ति

who is the best person, श्रेष्ठ व्यक्ति कौन है ?

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बहुत पुरानी बात है गौतम बुध एक शहर में ठहरे हुए थे, उनके कुछ शिष्य भी उनके साथ थे, उनके शिष्य एक दिन शहर में घूमने निकले तो उस शहर के लोगों ने उन्हें बहुत बुरा भला कहा, शिष्यों को बहुत बुरा भला लगा और वह वापस लौट आए, गौतम बुध ने जब देखा कि उनके सभी शिष्य बहुत क्रोध में दिख रहे हैं तो उन्होंने पूछा क्या बात है आप सभी इतने गुस्से में क्यों हैं। तभी एक शिष्य क्रोध में बोला हमें यहां से तुरंत प्रस्थान करना चाहिए-  जब हम बाहर शहर में घूमने गए तो यहां के लोगों ने बिना वजय हमें बहुत बुरा भला कहा, जहा हमारा सम्मान न हो वहां हमें एक पल भी नहीं रुकना चाहिए, यहां के लोग तो दुर्व्यवहार के सिवा कुछ जानते ही नहीं गौतम बुद्ध ने मुस्कुराते हुए कहा क्या किसी और जगह तुम सत व्यवहार की अपेक्षा रखते हो दूसरा शिष्य बोला इस शहर से तो अच्छे ही लोग होंगे तब गौतम बुद्ध बोले, किसी जगह को सिर्फ इसलिए छोड़ देना गलत होगा कि वहां के लोग दुर्व्यवहार करते हैं- वैसे भी हम तो संत हैं हमें तो कुछ ऐसा करना चाहिए कि जिस स्थान पर भी जाएं उस स्थान को तब तक ना छोड़े, जब तक कि अपनी अच्छाइयों से वहां के लोगों को बदल न दें, हम ज