संदेश

अक्तूबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

test

एक दिन महात्मा बुद्ध, प्रवचन सभा में आकर मौन बैठ गये, सारे शिष्य , उनके इस मौन के कारण चिंतित हुए, कि कहीं महात्मा बुद्ध बीमार तो नहीं है। आखिर कार  एक शिष्य ने पूछ ही लिया, "भन्‍ते ! आप आज इस तरह चुप  क्‍यों हैं?” वे नहीं बोले तो दूसरे शिष्य ने फिर पूछा -"गुरुदेव ! आप ठीक तो हैं?” बुद्ध फिर भी मौन ही बैठे रहे। इतने में बाहर से एक व्यक्ति ने, तेजी से चिल्लाते हुए पूछा,“आज आपने मुझे धर्मसभा में आने की अनुमति क्‍यों नहीं दी?" बुद्ध ने कोई उत्तर नहीं दिया, और आंखें बन्द कर ध्यानमग्न हो गये। वह बाहर खड़ा व्यक्ति, और जोर से चिल्ला कर बोला- "मुझे धर्मसभा में क्यों नहीं आने दिया जा रहा है?” धर्मसभा में बैठे, बुद्ध के शिष्यों में से एक ने, उस इंसान का समर्थन करते हुए कहा- “भन्ते! उसे धर्मसभा में आने की अनुमति प्रदान करे ।” महात्मा बुद्ध ने आंखें खोलीं और बोले- "नहीं, उसे अनुमति नहीं दी जा सकती , क्योंकि वह अछूत है।” “अछूत ! लेकिन क्यों?” सारे शिष्य सुनकर आश्चर्य में पड़ गये, कि भन्ते यह छुआछूत कब से मानने लग गये? महात्मा बुद्ध ने, शिष्य समुदाय के मन के भावों को तोड़ते